माघ मेला 2026: भारत की पावन धरती पर हर वर्ष होने वाला माघ मेला केवल एक धार्मिक को उत्सव नहीं बल्कि आस्था और एक दूसरे से मिलन का पर्व है| यह मेला सनातन धर्म की तपस्या और श्रद्धा का महासंगम है| जैसा कि आप सभी को पता है उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हाल ही में महाकुंभ आयोजित किया गया था| अब इस पावन धरती पर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में त्रिवेणी संगम जहां पर गंगा, जमुना और सरस्वती मिलती है वहां पर माघ मेला का आयोजन किया जाएगा|
यह मेला 2026 में इसलिए भी विशेष महत्व रहता है क्योंकि यह कुंभ मेले के तुरंत बाद आयोजित होगा इस मेले में स्नान दान और साधना को बहुत महत्व दिया जाएगा| आप भी माघ मेला में जाना चाहते हैं तो उसे जुड़ी हुई जानकारी जैसे की स्नान की तिथि, शाही स्नान, रहने की व्यवस्था, माघ मेले का पूरा कार्यक्रम, मग मिले तक कैसे पहुंच जाए, वहां पर ठहरने की व्यवस्था हेल्पलाइन नंबर , वह अन्य जानकारी आपको यहां प्रदान की जाएगी|
माघ मेला 2026 की तिथि
माघ मेला 2026 की शुरुआत 15 जनवरी 2026 जिस दिन मकर संक्रांति होगी उसी दिन से शुरू होगी और इसका समापन महाशिवरात्रि जो की 24 फरवरी 2026 को होगा उसे दिन समाप्त हो जाएगा|

उत्तर प्रदेश सरकार वह प्रयागराज प्रशासन द्वारा शाही स्नान व अन्य धार्मिक कार्यक्रम रखे जाएंगे| नीचे दिए गए तालिका में स्नान की तिथियां दी गई है आप इन तिथियां को देखकर अगर आप भी माघ मेला में आना चाहते हैं तो कोशिश करें इन तिथियां में आकर स्नान करें यह आपके लिए बहुत ही अच्छी रहेगी
पौष पूर्णिमा– यह पूर्णिमा 14 जनवरी 2026 को दिन बुधवार जिस दिन मेला प्रारंभ होगा उसी दिन होगी| अगर आप उसे दिन शाही त्रिवेणी संगम में स्नान करते हैं तो यह आपके शरीर और आपके अन्य कासन के लिए बहुत ही लाभकारी रहेगा|
मकर संक्रांति- जिस दिन यह मेला प्रारंभ होगा उसके अगले दिन ही मकर संक्रांति का स्नान आरंभ हो जाएगा यह स्नान 15 जनवरी 2026 को दिन गुरुवार को होगा| यह बताने की किसी को आवश्यकता नहीं है कि मकर संक्रांति का स्नान त्रिवेणी संगम में कितना लाभकारी रहेगा|
माघ अमावस्या– माघ अमावस्या 28 जनवरी 2026 को दिन बुधवार को होगी|
मौनी अमावस्या- यह मुख्य स्नान का दिन है यह 29 जनवरी 2026 को दिन गुरुवार को होगा| इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना पितरों का तर्पण करना और दान पूर्ण करना बहुत ही शुभ माना जाता है| अगर आपको भी या आपके किसी परिवार को पितृ दोष है तो उसे दिन स्नान करना आपके लिए बहुत लाभकारी रहेगा इस दिन मौन रहकर व्रत करने से भी बहुत सी मनोकामना पूरी होती है और पापों से मुक्ति मिलती है इसलिए इसे मौनी अमावस्या भी कहा जाता है| जरूरतमंदों को दान देना, खासकर वस्त्र और अन्न का दान करना, बहुत फलदायी माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु, पीपल के पेड़ और अन्य देवताओं की भी पूजा की जाती है।
बसंत पंचमी स्नान- यह स्नान 3 फरवरी 2026 को दिन मंगलवार को मनाया जाएगा| बसंत पंचमी पर स्नान का महत्व मां सरस्वती और ज्ञान की प्राप्ति से जुड़ा है। इस दिन अमृत स्नान करने से सुख, समृद्धि और सफलता मिलती है। में माघ मेले में बसंत पंचमी पर विशेष “अमृत स्नान” या “शाही स्नान” होता है, जिसे अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
माघी पूर्णिमा स्नान: यह स्नान 12 फरवरी 2026 को दिन गुरुवार को पूर्ण होगा| इस नाम में स्नान के बाद अन्न, तिल, गुड़, घी और सफेद वस्तुएं (जैसे दूध, दही, चावल) दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान भी किया जाता है।
महाशिवरात्रि स्नान: यह स्नान मग मिले के अंतिम दिन या फिर कहीं समापन दिवस को मनाया जाएगा जो की 24 फरवरी 2026 को दिन मंगलवार को पूर्ण होगा| महाशिवरात्रि और माघ मेला के दौरान संगम में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। माघ मेले में महाशिवरात्रि का शाही स्नान माघ मेले का आखिरी विशेष स्नान होता है। इस पवित्र दिन गंगा में डुबकी लगाने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही, इस दिन शिव योग और रवि योग जैसे शुभ संयोग भी बनते हैं, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
माघ मेला 2026 का धार्मिक महत्व
जैसा कि आज सभी को पता है माघ मेला त्रिवेणी संगम के तट के ऊपर बनाया जाता है जहां पर तीनों नदियां गंगा जमुना और सरस्वती मिलती है| यह स्थान तीर्थराज प्रयाग के नाम से भी प्रसिद्ध है| एक बहुत ही प्रसिद्ध वाक्य है माघ मास में संगम स्नान करने का फल सभी यज्ञों के समान है|
हिंदू शास्त्रों के अनुसार माघ मास में पृथ्वी पर संगम में देवता खुद स्नान करने आते हैं| इसके कुछ धार्मिक महत्व भी है जिनका मुख्य उद्देश्य है आत्म शुद्धि और मानसिक शांति, पितरों की तृप्ति मोक्ष प्राप्ति की आकांक्षा तथा बहुत से अनेक फल|
Also Check– माघ मेला 2026 में ठहरने की व्यवस्था- टेंट सिटी और धर्मशाला की जानकारी
माघ मेला 2026 का पूरा कार्यक्रम
जैसा कि आप सभी को बताया गया है की मां केवल स्नान पर अब तक सीमित नहीं है यहां पूरे महीने विभिन्न धार्मिक को संस्कृत कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं| यह कार्यक्रम भक्तों द्वारा आप प्रशासन द्वारा आयोजित किए जाते हैं इनमें
- अखाड़े की पेशवाई और शोभायात्राएं शामिल हैं
- साधु संत के प्रवचन और सत्संग
- संतो द्वारा भंडारा व अनुदान कार्यक्रम
- प्रशासन द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
- कथा का आयोजन
- सबसे महत्वपूर्ण है संगम की आरती और दीपदान समारोह- प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु गंगा आरती में शामिल होते हैं जो भक्त और आस्था का एक बहुत ही अमूल्य अंग है|
माघ मेला 2026 तक कैसे पहुंचे
बहुत से श्रद्धालु इस मेले में आना चाहते हैं लेकिन उनको पता नहीं है कि इस मेले में आना कहां से है कहां से आना है हम आपको बता रहे हैं कि आप भी माघ मेला 2026 में आना चाहते हैं जो की प्रयागराज उत्तर प्रदेश में हो रहा है तो वहां तक पहुंचना बहुत आसान है|

हवाई मार्ग– आप किसी भी प्रदेश से अगर कोई भी हवाई सेवा प्रयागराज के लिए उपलब्ध हो तो आप सीधा प्रयागराज के लिए टिकट ले प्रयागराज एयरपोर्ट जो की बमरौली में है वहां से संगम सिर्फ 15 किलोमीटर की दूरी पर है|
रेल मार्ग– अगर आप रेल मार्ग से आना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी टिकट जल्द से जल्द बुक करवा ले| आप अपनी टिकट प्रयागराज जंक्शन, प्रयागराज शिवकी, प्रयागराज संगम, या नैनी स्टेशन पर बुक कर सकते हैं इस सभी स्टेशन से संगम बहुत ही नजदीक है|
सड़क मार्ग- अगर आप अपनी गाड़ी या फिर कोई टैक्सी बुक करके आना चाहते हैं तो आपको राष्ट्रीय राजमार्ग NH 19 और NH 35 जो की प्रयागराज को लखनऊ वाराणसी कानपुर दिल्ली आदि से जोड़ते हैं उनसे आ सकते हैं आप उत्तर प्रदेश की यूपीएसआरटीसी UPSRTC या फिर निजी वोल्वो जो कि हर टाइम चलती है उनकी भी सेवा लेकर संगम में आ सकते हैं
माघ मेला हेल्पलाइन नंबर
अगर आपको कुछ भी समस्या का सामना करना पड़ रहा हो तो आप दिए गए नंबरों में कॉल करके हेल्प मांग सकते हैं
पुलिस कंट्रोल रूम 100
मेडिकल हेल्प 108
आपातकालीन सेवा 112
“माघ मेला 2026 हेल्पलाइन नंबर व प्रशासनिक जानकारी”
माघ मेला 2026 में अक्षर पूछे जाने वाले प्रश्न FAQ
माघ मेला 2026 की शुरुआत 15 जनवरी मकर संक्रांति के दिन से शुरू होगी|
प्रयागराज के त्रिवेणी संगम तट पर माघ मेला 2026 मनाया जाएगा
माघ मेले में शाही स्नान मौनी अमावस्या चौकी 29 जनवरी 2026 को है उसको मुख्य स्नान या शाही स्नान के रूप में मनाया जाएगा|
कुंभ मेला 12 वर्ष में एक बार होता है जबकि माघ मेला हर वर्ष आयोजित किया जाता है|
अगर आप माघ मेला में ठहरना चाहते हैं तो आप टेंट सिटी में टेंट ले सकते हैं धर्मशाला में रूम ले सकते हैं या फिर होटल में भी ठहरने की व्यवस्था उपलब्ध है|
माघ मेला 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, एकता और सहिष्णुता का प्रतीक है। यह मेला पूरे विश्व से आने वाले साधु-संतों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों का संगम बन जाता है। इस दौरान प्रयागराज शहर आध्यात्मिकता से ओतप्रोत हो उठता है। पूरे क्षेत्र में वैदिक मंत्रों की गूंज, आरती की रोशनी और भक्ति का वातावरण हर किसी के मन को शांति प्रदान करता है।
सरकार और प्रशासन द्वारा यात्रियों की सुविधा के लिए परिवहन, सुरक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता की विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं ताकि हर श्रद्धालु को एक सुखद और सुरक्षित अनुभव मिल सके। माघ मेला के दौरान संगम तट पर लगने वाले आध्यात्मिक शिविरों में योग, ध्यान और धार्मिक प्रवचन भी कराए जाते हैं, जिससे व्यक्ति आत्मिक शांति और जीवन के गहरे अर्थों को समझ पाता है। यह मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है।
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