कुंभ मेला और माघ मेला 2026: महत्व, व स्नान तिथियां

कुंभ मेला और माघ मेला: कुंभ मेला हर 12 साल में लगने वाला एक बहुत ही बड़ा मेला है| कुंभ मेले में बहुत ही दूर-दूर से श्रद्धालु, ऋषि मुनि आते हैं और कुंभ में स्नान का आनंद लेते हैं| कुंभ मेला चार पवित्र स्थान में मनाया जाता है प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक| यह एक बहुत ही बड़ा और भव्य आयोजन होता है जिसमें न केवल भारतवर्ष से बल्कि दुनिया भर से दिव्य ऋषि मुनि यहां पधारते हैं और स्नान का आनंद लेते हैं|

कुंभ मेला और माघ मेला 2026

प्रयागराज में और हरिद्वार में हर 6 साल में अर्ध कुंभ मनाया जाता है| जबकि हर 3 साल में एक पवित्र स्थान पर कुंभ मनाया जाता है| इसी तरह हर 144 साल में प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन किया जाता है|

कुंभ मेला और माघ मेला में क्या फर्क है?

कुंभ का महत्व एवं इसकी शुरुआत

कुंभ मेले का शुभारंभ पुरानी कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन से शुरू हुआ था| जब समुद्र मंथन करते समय उसमें से अमृत का कलश निकला तो उसके लिए देवताओं और असुरों में बहस हुई| इसी बहस और छीना चपटी में कलश से कुछ बंदे चार स्थानों पर गिरी वह दिव्य स्थान है प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक| इसी कारण से हर 3 वर्ष में यहां पर कुंभ का आयोजन किया जाता है|

माघ मेला 2026

माघ मेला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित त्रिवेणी संगम पर मनाया जाता है और यह हर वर्ष फरवरी महीने में मनाया जाने वाला पर्व है| यह करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रतीक है| इसे साधना, संयम और जागरण का महापर्व भी कहा जाता है| यहां पर गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में स्नान करने पर पापों का नाश होता है|

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कुंभ मेला और माघ मेला का महत्व एवं शुरुआत

माघ मेला एक बहुत ही पुरानी हिंदू आस्था है| इसमें गंगा, जमुना और अदृश्य सरस्वती नदी एक साथ मिलते हैं और यहां पर सभी ऋषि मुनि तथा विभिन्न संस्थाओं से आए श्रद्धालु स्नान करते हैं और अपने विभिन्न किए हुए पापों का प्रायश्चित करते हैं|

माघ मेले की शुरुआत पोष पूर्णिमा से होती है| इन नदियों में स्नान से ही हमें अनेक पुण्य का फायदा मिलता है और जीवन मृत्यु के चक्कर से भी हमें छुटकारा मिल जाता है| इस स्थान पर कई श्रद्धालु जाकर कल्पवास करते हैं और कड़ाके में पढ़ने वाली ठंड में अपने आध्यात्मिक तप से पुण्य को प्राप्त करते हैं| इसमें सूर्य देव की पुजा का विशेष महत्व है|

माघ मेले के महत्वपूर्ण स्नान

जनवरी फरवरी माह में बहुत से स्नान है| जिनमें से कुछ प्रमुख तिथियां इस प्रकार है|

पोष पूर्णिमा 3 जनवरी 2026
मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026
मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026
बसंत पंचमी 13 जनवरी 2026
माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026
महा शिवरात्रि 15 फरवरी 2026

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